पहाड़ों की वादियों में सुकून ढूंढने की चाहत अब सिरदर्द बनने लगी है। लोग छुट्टियां मनाने शिमला, मनाली या उत्तराखंड तो निकल जाते हैं, लेकिन वहां जाकर सिर्फ गाड़ियों का धुआं और ट्रैफिक जाम मिलता है। सोशल मीडिया पर पहाड़ों की ऐसी तस्वीरें देखकर अब मशहूर बिजनेसमैन आनंद महिंद्रा ने भी बड़ी चिंता जताई है।

भीड़ से लोग परेशान, महिंद्रा ने जताई चिंता
आनंद महिंद्रा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा है कि भारत के सबसे लोकप्रिय टूरिज्म डेस्टिनेशन अब अपनी सफलता का शिकार बनते जा रहे हैं। हर हफ्ते सोशल मीडिया पर ट्रैफिक जाम और हिल स्टेशन पर लोगों की भीड़ हद से ज्यादा बढ़ती जा रही है। छुट्टियैां रिलैक्स करने से ज्यादा लोगों का धैर्य चेक कर रही है। इन जगहों को पर्यटकों की बढ़ती संख्या से निपटने के तरीके खोजने होंगे। आगे महिंद्रा ने इससे निपटने का तरीका भी बताया है।
बता दें कि इन दिनों उत्तराखंड से लेकर सिक्किम के जीरो प्वाइंट तक, इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियोज वायरल हैं जहां सड़कें गाड़ियों से पटी नजर आती हैं। पहाड़ों पर जिस ओर नजर जा रही है, उधर सिर्फ गाड़ियां ही गाड़ियां दिखती हैं।

ढूंढो देश के छिपे हुए ठिकाने, महिंद्रा करेंगे फ्री प्रमोशन
महिंद्रा ने इस परेशानी भीड़ का एक बहुत बढ़िया समाधान बताया है। उन्होंने कहा कि हमारा भारत बहुत बड़ा है और यहां ऐसी कई खूबसूरत जगहें हैं जो बेहद शानदार हैं लेकिन लोग उनके बारे में उतना जानते ही नहीं। महिंद्रा ने एक बड़ा ऑफर भी दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी कोई देश की ऐसी छिपी हुई खूबसूरत लोकेशन को उनके साथ शेयर करेगा, वो उसे अपने सोशल मीडिया पर फ्री में प्रमोट करेंगे।

वालपराई की खूबसूरत तस्वीरें कीं शेयर
महिंद्रा ने खुद इस मुहिम की शुरुआत तमिलनाडु के ‘वालपराई’ की तस्वीरें शेयर करके की है। उन्होंने लिखा कि इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह वही मुन्नार (केरल) है, जिसे हममें से कई लोग 30 साल पहले देखना चाहते थे। पोलची से 40 घुमावदार मोड़ों वाली सड़क, बांध, वर्षा वन के नजारे और हाथियों से लेकर शेर-पूंछ वाले मकाक और ग्रेट हॉर्नबिल जैसे वन्यजीव यहां देखने को मिलते हैं। उन्होंने #SundayWanderer हैशटैग के साथ यह पोस्ट लिखी, जिसे 2 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।
यूजर ने दी ये नसीहत
महिंद्रा की इस पोस्ट पर 2 लाख से ज्यादा कमेंट्स आए हैं, जहां लोग इस सलाह पर अमल करने की बात कह रहे हैं। इसी बीच एक यूजर ने कमेंट करते हुए बहुत पते की बात लिखी। यूजर ने कहा कि सर, छिपे हुए रत्नों की खोज जिम्मेदारी से करनी चाहिए। यदि हम प्रकृति का सम्मान करना नहीं सीखेंगे, तो आज के ये खजाने कल पर्यटन के शिकार बन जाएंगे। बात बिल्कुल सच है, क्योंकि बिना जिम्मेदारी के नए ठिकाने भी कचरे का ढेर बन जाएंगे।