वन्यजीव से विरासत तक, पुणे रोड शो में छत्तीसगढ़ की खास झलक
छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने पुणे में रोड शो का आयोजन किया। फिक्की (FICCI) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के वन्यजीव, जनजातीय संस्कृति, विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट और प्रमुख पर्यटन स्थलों को पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया।


कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट, होटल व्यवसायी और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें हुईं, जिनमें पर्यटन को बढ़ावा देने और व्यावसायिक साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की अध्यक्ष नीरू शर्मा ने कहा कि पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के साथ संवाद का यह अच्छा अवसर है। उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करना है। साथ ही उन्होंने सभी हितधारकों को राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों का अनुभव लेने का आमंत्रण दिया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य (आईएफएस) ने कहा कि राज्य में पर्यटन सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। पर्यटकों के बेहतर अनुभव के लिए कई नई पहल की गई हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के ट्रैवल ट्रेड से जुड़े लोगों से छत्तीसगढ़ के पर्यटन सर्किट और विशेष पर्यटन अनुभवों के प्रचार-प्रसार में सहयोग की अपील की।

छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष जसप्रीत सिंह भाटिया ने कहा कि पर्यटन बोर्ड के साथ मिलकर राज्य की समृद्ध विरासत, वन्यजीव, जनजातीय संस्कृति और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। ऐसे रोड शो नए व्यावसायिक अवसर और मजबूत साझेदारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पर्यटन बोर्ड के अनुसार, यह रोड शो राज्य के बाहर प्रमुख शहरों में पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक योजना का हिस्सा है। देश के अलग-अलग शहरों में कुल 8 रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं। पुणे में आयोजित यह तीसरा रोड शो था। इससे पहले दिल्ली और भुवनेश्वर में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
कार्यक्रम में चित्रकोट जलप्रपात, कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव मंदिर और जनजातीय संस्कृति सहित छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों की जानकारी दी गई। शाम को राज्य की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। कार्यक्रम का समापन नेटवर्किंग डिनर के साथ हुआ, जिसमें पर्यटन क्षेत्र में भविष्य के सहयोग पर चर्चा की गई।
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