आज की वॉक के साथ हुआ विरासत वॉक श्रृंखला का समापन
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छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड और पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय, रायपुर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित श्रृंखला की तीसरी और अंतिम विरासत वॉक 26 जुलाई, 2024 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस वॉक का उद्देश्य युवा पर्यटन क्लब के सदस्यों और आम जनता को समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध रायपुर शहर की व्यापक समझ प्रदान करना था।
विरासत वॉक श्रृंखला का आयोजन भारत द्वारा प्रथम बार नई दिल्ली में विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र की मेज़बानी करने के स्वर्णिम अवसर को यादगार बनाने के लिए किया गया था, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए भारत के समर्पण को रेखांकित करता है। रायपुर के छिपे हुए रत्नों को प्रदर्शित करके और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देकर, इस श्रृंखला ने शहर के सांस्कृतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रायपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की गहरी समझ प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई इस श्रृंखला का उद्देश्य युवाओं और आम जनता दोनों को जोड़ना था। शहर के वास्तुशिल्प चमत्कारों, धार्मिक स्थलों और इसकी दीवारों में समाहित कहानियों को प्रदर्शित करने के लिए वॉक को सावधानीपूर्वक क्यूरेट किया गया था। खराब मौसम के बावजूद, जिसके कारण शुरुआत में थोड़ी देरी हुई, वॉक प्रतिभागियों के एक समर्पित समूह के साथ सुचारू रूप से आगे बढ़ी।
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड और पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार, छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय, रायपुर द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित

हेरिटेजवाला के संस्थापक, और विरासत विशेषज्ञ शिवम त्रिवेदी के नेतृत्व में आज आयोजित अंतिम वॉक में प्रतिभागियों को समय की यात्रा पर ले जाया गया, जिनकी विशेषज्ञता और शहर के इतिहास के प्रति जुनून ने पूरे सफर में प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जिसमें लगभग 650 साल पुराने वास्तुकला के रत्न, स्वामी विवेकानंद सरोवर (बूढ़ा तालाब) से शुरू होकर, यह पदयात्रा सदियों पुराने इतिहास से होकर गुज़री। समूह ने 1402 ई. में निर्मित कलचुरी शासन काल में निर्मित रायपुर किले के खंडहरों में इतिहास को जाना, जो अब बाबा हज़रत बुरहानशाह वली की प्रतिष्ठित दरगाह है। वहीँ 700 साल पुराने प्राचीन दत्तात्रेय मंदिर और लगभग 1150 साल पहले निर्मित ब्रह्मपुरी में विस्मयकारी श्री विरंचिनारायण और नरसिंहनाथ मंदिरों के दर्शन के साथ यह रोमांचकारी यात्रा आगे बढ़ते हुए अनुमानतः 200 साल से अधिक प्राचीन बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर पर समाप्त हुई, जो इस ऐतिहासिक यात्रा का एक उपयुक्त अंत था।
वास्तुकला के चमत्कारों से परे, आज की विरासत वॉक ने पर्यटन मंत्रालय की पहलों के अनुरूप, इस पदयात्रा में टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन प्रथाओं के महत्व पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को ट्रैवल फॉर लाइफ मूवमेंट से परिचित कराया गया, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक यात्रा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक वैश्विक पहल है, इस प्रतिबद्धता को मजबूत करने के लिए, सभी प्रतिभागियों ने ट्रैवल फॉर लाइफ शपथ भी ली।
प्रतिभागियों को ट्रैवल फॉर लाइफ मूवमेंट से परिचित कराया

पदयात्रा के समापन पर, छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय के प्रबंधक मयंक दुबे ने सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह और समर्थन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। विरासत वॉक श्रृंखला को शानदार सफलता बनाने में उनके अमूल्य सहयोग के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड, अगोरा ईको-टूरिज्म एवं हेरिटेजवाला को विशेष धन्यवाद दिया गया।
इस विरासत वॉक श्रृंखला का शुभारंभ 12 जुलाई 2024 को आयोजित प्रथम वॉक के साथ किया गया था, वहीं दूसरी वॉक 19 जुलाई 2024 को रखी गई थी जिसमें अभी तक की तीनों वॉक में सर्वाधिक 75 युवा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। इस श्रृंखला की अंतिम वॉक आज 26 जुलाई, 2024 को आयोजित की गई जिसमें सामूहिक रूप से युवाओं और आम जनता के बीच रायपुर की विरासत की गहरी समझ और प्रशंसा में योगदान दिया है।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को अधिक से अधिक बढ़ावा देने और राज्य में मौजूद विभिन्न पर्यटक स्थलों के बारे जानकारी देने के उद्देशय से निकट भविष्य में युवा पर्यटन क्लब सदस्यों के लिए इस तरह की विरासत वॉक के साथ साथ शैक्षणिक यात्राओं का भी आयोजन करने की योजना पर पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार का छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय, रायपुर कार्य कर रहा है।
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