अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के उपलक्ष्य में किया गया ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन
शुक्रवार 17 मई, 2024 को पर्यटन मंत्रालय के छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय, ने भारत पर्यटन मुंबई के सहयोग से युवा पर्यटन क्लब सदस्यों के लिए अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाने के लिए एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और इतिहास और परंपराओं की गहरी समझ को बढ़ावा देने में संग्रहालयों के महत्व को उजागर करना था।
इस वेबिनार में हेरिटेज सलाहकार और ‘हेरिटेजवाला’ के संस्थापक, श्री शिवम त्रिवेदी मुख्य वक्ता थे। उनकी प्रस्तुति अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के महत्व पर केंद्रित थी, जो सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक परिदृश्य में संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व स्तर पर मनाया जाता है। श्री त्रिवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि संग्रहालय केवल कलाकृतियों का भंडार नहीं हैं बल्कि गतिशील संस्थान हैं जो सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान देते हैं, सीखने को बढ़ावा देते हैं और भावी पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस, विषय पर उनके द्वारा दी गई विस्तृत प्रस्तुति में उन्होंने बताया कि संग्रहालय इतिहास के खजाने की तरह होते हैं जहां पर संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक महत्व रखने वाली अवशेषों और कलाकृतियों को सुरक्षित रखा जाता है। यह अमूल्य धरोहर न केवल हमें अपनी विरासत से जोड़ते हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते हैं। ऐसे में संग्रहालय की महत्ता को समझाने के लिए हर साल 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है।

भारत का इतिहास समृद्ध वास्तुकला, संस्कृति, परंपराओं से परिपूर्ण है, यहाँ कई वंशों ने राज किया, जिनकी मुद्रा, पहनावा, औजार और अन्य कलाकृतियों के बारे में जानने के लिए वर्तमान में लोग उत्साहित रहते हैं। ऐसे में भारत के लगभग सभी हिस्सों में भारत के प्रमुख संग्रहालय स्थापित किए गए ताकि पर्यटन और इतिहास प्रेमी भारतीय कलाकृतियों और अवशेषों के जरिए समृद्ध संस्कृति और परंपरा को जान सकें।
संग्रहालय दिवस के इतिहास को बताते हुए उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ म्यूजियम (आईकॉम) को पहली बार संग्रहालय दिवस मनाने का विचार आया और 1977 में इस दिन को मनाने की शुरुआत की गई। उसके बाद हर साल 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाने लगा। इस विशेष अवसर पर विश्व के कई देशों के अंदर स्थापित संग्रहालय इस दिन का आयोजन करते हैं और संग्रहालय के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। यह थीम अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसी तरह, अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस 2024 का विषय अथवा थीम है, “ शिक्षा और अनुसंधान के लिए संग्रहालय”।

अपनी प्रस्तुति के अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों से एक निवेदन करते हुए इस वर्ष एक ‘कॉल फॉर एक्शन’ की विनम्र अपील करते हुए कहा कि “इतिहास से जुड़ी कोई भी प्राचीन कलाकृति अथवा अवशेष अगर आपके पास है जिसे संरक्षित करने की आवश्यकता है तो इस अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर अपने नज़दीकी संग्रहालय में उसे प्रदान कर उसका संरक्षण सुनिक्षित करें।”
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर श्रीमती मालती दत्ता, सहायक निदेशक, भारत पर्यटन औरंगाबाद एवं श्रीमती शतरूपा दत्ता, सहायक निदेशक, भारत पर्यटन मुंबई उपस्थित रहीं। श्रीमती शतरूपा दत्ता ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पर्यटन में संग्रहालयों के महत्व पर प्रकाश डाला, एवं संग्रहालयों को प्रमुख पर्यटक आकर्षणों के रूप में बढ़ावा देने के लिए भारत पर्यटन द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने ऐतिहासिक स्मारकों और कलाकृतियों के संरक्षण के महत्व के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न पहलों और अभियानों के बारे में बात की। श्रीमती दत्ता ने प्रतिभागियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करने और उस पर गर्व करने और इसके संरक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
आज आयोजित वेबिनार में विभिन्न स्कूलों/कॉलेजों/विश्वविद्यालयों के छात्रों और पर्यटन हितधारकों सहित 90 प्रतिभागी शामिल थे। उपस्थित प्रतिभागियों के लिए रखे गए प्रश्न उत्तर सत्र के दौरान मुख्य वक्ता द्वारा जानकारी प्रदान की गई। प्रतिभागियों के अनुसार यह वेबिनार अत्यधिक जानकारीपूर्ण था और इसने समाज में संग्रहालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और सांस्कृतिक संरक्षण में सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
वेबिनार का संचालन पर्यटन मंत्रालय के छत्तीसगढ़ नोडल कार्यालय के प्रबंधक मयंक दुबे द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। उन्होंने एक आकर्षक और इंटरैक्टिव (परस्पर संवादात्मक) सत्र की सुविधा प्रदान करते हुए, कार्यक्रम के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित किया एवं इस बात पर प्रकाश डाला कि वेबिनार के दौरान साझा किया गया ज्ञान अत्यधिक फायदेमंद था और यह उपस्थित लोगों को सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार में योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा। उनके अनुसार पर्यटन मंत्रालय और सांस्कृतिक विशेषज्ञों के बीच सहयोग ने भारत के ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
वेबिनार के अंत में सुश्री राधिका शर्मा, सहायक प्रबंधक ने सभी वक्ताओं को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए और प्रतिभागियों को उनकी उत्साही भागीदारी के लिए आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव दिया।
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