छत्तीसगढ़ के राजकीय वनभैंसे के कुनबे में आए 3 नए सदस्य, अब 14 हुई संख्या
छत्तीसगढ़ में राजकीय पशु वनभैंसे के संरक्षण की कोशिशों को नई उम्मीद मिली है। असम से लाई गई तीन मादा वनभैंसों ने 15 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच तीन शावकों को जन्म दिया है। इससे वनभैंसों की संख्या छह से बढ़कर 14 हो गई है। बारनवापारा के बाड़े में रखे गए नवजात शावकों और उनकी मां की विशेष देखरेख की जा रही है। वर्ष 2025 में दो शावकों की मौत के बाद वन विभाग इस बार स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
तीन शावकों के जन्म से बढ़ा वनभैंसों का कुनबा
राज्य में राजकीय पशु वनभैंसे की संख्या बढ़ाने के लिए वर्ष 2020 में असम से दो और 2023 में चार मादा वनभैंसें लाई गई थीं। अब इन्हीं में से तीन ने हाल के दिनों में शावकों को जन्म दिया है। इस तरह वनभैंसों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है। इन तीनों शावकों के पिता मानस नाम का वनभैंसा है। राजकीय पशु के शावकों के जन्म की पुष्टि चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ओपी यादव ने भी की है।
पिछले साल दो शावकों की हुई थी मौत, इस बार खास निगरानी
वर्ष 2025 में दो शावकों की मौत हो गई थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने इस बार पहले से ही सावधानी बरती। तीनों मादा वनभैंसों के गर्भवती होने की जानकारी मिलने के बाद उन्हें झुंड से अलग रखा गया था। उनके खानपान और देखरेख के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई। शावकों के जन्म के बाद से ही नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है, ताकि उन्हें और उनकी मां को किसी तरह के संक्रमण से बचाया जा सके।
शावकों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बारनवापारा स्थित बाड़े के उस हिस्से में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है, जहां मां और शावकों को रखा गया है। हाथियों सहित दूसरे वन्यजीवों की पहुंच रोकने के लिए अलग से इंतजाम किए गए हैं। वनभैंसों की निगरानी के लिए गश्ती दल 24 घंटे तैनात है। इसके अलावा बाड़े के आसपास आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। शावकों को फिलहाल लोगों से दूर रखा जा रहा है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।
चिकित्सक और केयरटेकर के अलावा प्रवेश पर रोक
नवजात शावकों और उनकी मां को फिलहाल क्वारंटाइन में रखा गया है। अधिकारियों, केयरटेकर और चिकित्सकों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को उनके पास जाने की अनुमति नहीं है। शावकों के नजदीक जाने से पहले अधिकारी और चिकित्सक खुद को सैनिटाइज करते हैं। इसके बाद ही उन्हें देखने या उनकी देखभाल के लिए अंदर जाते हैं। संक्रमण से बचाव के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
छोटू है छत्तीसगढ़ का एकमात्र प्योर नस्ल का वनभैंसा
छत्तीसगढ़ में छोटू नाम का वनभैंसा प्योर नस्ल का एकमात्र राजकीय पशु है। उम्र अधिक होने के कारण उसे फिलहाल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के पूर्वी हिस्से में बनाए गए वनभैंसा रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है।
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