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चित्रकोट से सिरपुर तक बदलेगी छत्तीसगढ़ की तस्वीर! 2028 तक ग्लोबल पहचान, 500 करोड़ निवेश और 1000 रोजगार का लक्ष्य

छत्तीसगढ़ पर्यटन और संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की तैयारी है। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में प्रेस वार्ता के दौरान विभाग की उपलब्धियों, योजनाओं और आगामी प्राथमिकताओं की जानकारी दी। सरकार का फोकस पर्यटन में निजी निवेश बढ़ाने, स्थानीय रोजगार पैदा करने, धार्मिक स्थलों का विकास करने और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने पर है।

प्रेस वार्ता में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे और टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम पूनम शर्मा मौजूद रहीं।

पर्यटन में निजी निवेश को बढ़ावा

मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले करीब ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की गई हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। इसकी अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये है।

61 ट्रेनों से 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए अयोध्या-काशी दर्शन

श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है। इनके जरिए 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए गए हैं। सरकार का कहना है कि धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को और सुगम बनाने पर जोर है।

होमस्टे से स्थानीय रोजगार पर जोर

पर्यटन का लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचाने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के अवसर बढ़ेंगे। वर्तमान में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है।

चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी

सरकार चित्रकोट को केवल जलप्रपात तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसे विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके अलावा सिरपुर के पर्यटन विकास के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।

भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ स्वीकृत

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की योजना है। भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वीकृति भारत सरकार से मिली है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे गए हैं।

डिजिटल बुकिंग से 6.48 करोड़ रुपये का राजस्व

पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल जानकारी और पर्यटन सुविधाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से करीब 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

2028 तक पर्यटन की नई पहचान बनाने का लक्ष्य

मंत्री ने कहा कि 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया में स्थापित करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में हर साल 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

18 पर्यटन संपत्तियों में निजी भागीदारी

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग

इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी की जाएगी। इसके साथ फिल्म और ओटीटी आधारित प्रचार, अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटरीच और इंटरनेशनल इन्फ्लुएंसर फैम टूर जैसे प्रयास भी प्रस्तावित हैं।

कलाकारों और संस्कृति के संरक्षण पर भी फोकस

संस्कृति क्षेत्र में कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण के लिए भी कई योजनाएं जारी हैं। कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार रुपये की सहायता मिल चुकी है। मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को करीब 19 लाख 8 हजार रुपये की राशि दी गई है।

407 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को पेंशन

वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से अभावग्रस्त वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को कुल 82 लाख 12 हजार रुपये पेंशन के रूप में दिए गए हैं। वर्तमान वर्ष में अब तक 121 लोगों को योजना का लाभ मिला है।

बस्तर पंडुम से लोक संस्कृति को बढ़ावा

प्रदेश के विभिन्न जिलों में सूचीबद्ध 89 मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव और समारोहों का आयोजन जिला प्रशासन के सहयोग से किया जा रहा है। एलडब्ल्यूई प्रभावित जिलों में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए आदि पर्व पंचांग तैयार किया जा रहा है। बस्तर की लोकपरंपरा को व्यापक पहचान देने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक और जिला स्तर पर बस्तर पंडुम आयोजित किया जा रहा है। बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों और पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने और सम्मान पाने का अवसर मिला।

लोककलाओं के संरक्षण के लिए नए आयोजन

पावस प्रसंग, रंगतरंग, रंगपरब और लोकरंग पर्व जैसे आयोजनों के जरिए शास्त्रीय नृत्य-संगीत, लोकवाद्य, लोकनाट्य और पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी लोक विधाओं को मंच दिया जा रहा है।

संस्कृति का डिजिटल आर्काइव तैयार

छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक स्मृतियों और लोक परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

सांस्कृतिक संस्थाओं को 7.85 करोड़ रुपये की सहायता

पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक आयोजनों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

नई फिल्म नीति तैयार करने की तैयारी

छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फिल्म नीति-2021 में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। संशोधनों के बाद नई फिल्म नीति तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों पर फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना और पात्र फिल्मों को सब्सिडी का लाभ देना है।

सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में बढ़ाने की पहल

सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सिरपुर में बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का सह-अस्तित्व है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया है।

63 संरक्षित स्मारकों का संरक्षण

प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर काम किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 स्मारकों के संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

रायपुर संग्रहालय में नई गैलरी और पुरखौती में लाइट एंड साउंड शो

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर में नई रियासत गैलरी बनाने और मौजूदा गैलरियों के उन्नयन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी काम चल रहा है। इन कार्यक्रमों में शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के साथ छत्तीसगढ़ की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखा जाएगा।

12 लाख पृष्ठों का डिजिटल अभिलेखीकरण

छत्तीसगढ़ से संबंधित करीब 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के जरिए आम लोगों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग और मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।

2750 साल पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण

पुरातत्व विभाग अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन करा चुका है। रायपुर जिले के आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में उत्खनन से करीब 2750 साल पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिले हैं। उत्खनन में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर कलचुरी काल तक के अवशेष और विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। सरकार का लक्ष्य स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।

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