ADTOI Chhattisgarh Chapter Organises Educational Tour to Uttarakhand
The Association of Domestic Tour Operators of India (ADTOI), Chhattisgarh Chapter, successfully organised a five-day educational familiarisation tour to Uttarakhand from 26th to 30th July 2026. The tour was led by Chapter Chairman Mr. Som Prakash Singh and Treasurer Mr. Deepak Maheshwari, with the participation of 20 travel industry members from Chhattisgarh. Members explored Uttarakhand's key tourist destinations, hospitality facilities, and tourism infrastructure to gain firsthand destination knowledge. The initiative aimed to strengthen industry networking and promote Uttarakhand as a preferred travel destination. ADTOI Chhattisgarh expressed gratitude to all tourism...
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने रामनामी समाज के वरिष्ठजनों का किया सम्मान, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री का हुआ प्रदर्शन
सारंगढ़-बिलाईगढ़ कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने सरसीवा थिएटर में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित रामनामी समुदाय पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन कार्यक्रम में शामिल होकर समाज के वरिष्ठजनों का शॉल, श्रीफल और रामायण ग्रंथ भेंटकर सम्मान किया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में रामनामी समाज के सदस्य मौजूद रहे। डॉक्यूमेंट्री में दिखी रामनामी समाज की सांस्कृतिक विरासत कार्यक्रम में प्रदर्शित राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री में रामनामी समाज की संस्कृति, परंपरा, आस्था और जीवन मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। उपस्थित लोगों ने फिल्म के माध्यम...
Bastar Pandum की गूंज राष्ट्रपति भवन तक, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन को मिली नई पहचान
छत्तीसगढ़ की समृद्ध बस्तर संस्कृति और जनजातीय परंपराओं को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर विशेष सम्मान मिला। Bastar Pandum-2026 के विजेता कलाकारों, पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्म सम्मान प्राप्त हस्तियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय दल का राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। उन्होंने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर उनका स्वागत किया, जिसे पूरे प्रतिनिधिमंडल ने आत्मीय और यादगार पल बताया। राष्ट्रपति ने सराही बस्तर की सांस्कृतिक विरासत राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमंडल...
Chhattisgarh Monsoon Tourism: बारिश में स्वर्ग बन जाते हैं राज्य के ये 5 पर्यटन स्थल
बारिश का मौसम शुरू होते ही Chhattisgarh Monsoon Tourism अपने चरम पर पहुंच जाता है। घने जंगल, बादलों से ढकी पहाड़ियां, उफनते झरने और हरियाली से लबालब घाटियां राज्य को प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बना देती हैं। बस्तर से लेकर सरगुजा तक फैले पर्यटन स्थल मानसून में अलग ही रंग में नजर आते हैं। अगर आप बारिश के मौसम में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो छत्तीसगढ़ के ये 5 पर्यटन स्थल आपकी सूची में जरूर होने चाहिए। चित्रकोट जलप्रपात: भारत का नियाग्रा मानसून में दिखता है सबसे भव्य बस्तर जिले...
Rakhigarhi Site: हड़प्पा सभ्यता की विरासत से रूबरू हुए छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश अग्रवाल
छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने हरियाणा प्रवास के दौरान विश्व की प्राचीनतम नगरीय सभ्यताओं में शामिल Rakhigarhi Site का दौरा किया। उन्होंने सिंधु-घाटी यानी हड़प्पा सभ्यता के इस प्रमुख पुरातात्विक स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहां मिले पुरातात्विक अवशेषों, प्राचीन नगर व्यवस्था, शिल्पकला, जल प्रबंधन प्रणाली और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े प्रमाणों की जानकारी ली। राखीगढ़ी में दिखी हजारों साल पुरानी सभ्यता की झलक मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं है। यह भारत की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक, सामाजिक और...
‘हमु काका बाबा ना पोरिया रे’ जानें कैसे आदिवासी विरासत का प्रतीक बना यह लोकगीत
भारत की लोक संस्कृति अपनी विविधता और समृद्ध परंपराओं के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। अलग-अलग राज्यों की अपनी लोकभाषाएं, लोकनृत्य और लोकगीत हैं। इन्हीं में से एक है 'हमु काका बाबा ना पोरिया रे', जो आज सोशल मीडिया की वजह से देशभर में लोकप्रिय हो चुका है। हालांकि, यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। कहां से आया हमु काका बाबा ना पोरिया रे? यह पारंपरिक लोकगीत पश्चिम भारत के आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ा है।...
Bastar Pandum: राष्ट्रपति भवन पहुंचेगा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी विशेष सम्मान
छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिलने जा रही है। Bastar Pandum के विजेता प्रतिभागियों, पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों और पद्मश्री सम्मानित विभूतियों का 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 30 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट करेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, जनप्रतिनिधि और बस्तर पंडुम-2026 के विजेता भी शामिल होंगे। यह दौरा छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को देश के सर्वोच्च संवैधानिक...
IITM Bengaluru में Chhattisgarh Tourism का दमदार प्रदर्शन, निवेश और पर्यटन को मिले नए अवसर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में Chhattisgarh Tourism लगातार प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने इंडिया इंटरनेशनल ट्रैवल मार्ट (IITM) Bengaluru में प्रभावशाली भागीदारी दर्ज कराई। यहां राज्य की पर्यटन संभावनाओं, निवेश के अवसरों और प्रमुख पर्यटन स्थलों को देशभर के पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किया गया। पर्यटन नीति और निवेश की संभावनाओं पर रहा फोकस आईआईटीएम बेंगलुरु...
Kanker Palace से Heritage Tourism को नई दिशा, डिजिटल क्रिएटर्स ने संभाली कमान
Heritage Tourism: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार नई पहल कर रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को कांकेर के ऐतिहासिक Kanker Palace में टूरिज्म बोर्ड की टीम और राज्यभर से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने युवराज जयप्रताप से मुलाकात की। इस दौरान हेरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने और बस्तर की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान दिलाने पर विस्तार से चर्चा हुई। कांकेर की विरासत और इतिहास पर हुई चर्चा बैठक के दौरान युवराज...
Rajkiya Titli Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में पहली बार जनता चुनेगी राजकीय तितली
Rajkiya Titli Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ जल्द ही अपनी पहली राजकीय तितली घोषित करने जा रहा है। इस अनूठी पहल के तहत वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने प्रदेशवासियों को सीधे इस प्रक्रिया से जोड़ते हुए ऑनलाइन मतदान शुरू किया है। नागरिक 31 अगस्त 2026 तक गूगल फॉर्म के माध्यम से अपनी पसंदीदा तितली के पक्ष में वोट दे सकते हैं। अंतिम निर्णय जनता की राय और विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं के आधार पर लिया जाएगा। तीन तितलियां अंतिम दौड़ में विशेषज्ञ समिति ने वैज्ञानिक और पारिस्थितिक मानकों के आधार पर तीन प्रजातियों को...