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अब टाटामारी में दिखेगा सूर्योदय और पुसपाल में सूर्यास्त, सरकार ने तैयार किया नया प्लान

बस्तर का नाम सुनते ही कभी लोगों के जेहन में डर बैठ जाता था। अब वक्त बदल गया है। सरकार की नई रणनीति से नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। इसी बीच कोण्डागांव वनमंडल से एक बड़ी खबर आ रही है। वन विभाग ने एक ऐसे इलाके को पर्यटन के नक्शे पर ला दिया है, जो अब तक पर्यटकों की नजरों से बिल्कुल दूर था।

केशकाल से चित्रकोट की दूरी होगी कम

विभाग ने ग्राम पुसपाल को केंद्र में रखकर एक नया पर्यटन सर्किट तैयार किया है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सैलानियों के लिए चित्रकोट पहुंचना आसान हो जाएगा। रास्ता छोटा होगा। आपकी यात्रा का समय भी बचेगा। अब लोग केशकाल के टाटामारी से अपनी यात्रा शुरू कर सकेंगे। इसके बाद वे चैतगृह भोगापाल और गोबरहीन के प्राचीन शिवलिंग के दर्शन कर पाएंगे। शाम को सीधे पुसपाल पहुंचकर ढलते सूरज का नजारा देख सकेंगे।

इस नए रूट की सबसे खास बात इसकी टाइमिंग है। पर्यटक सुबह टाटामारी में शानदार सूर्योदय देख सकेंगे। वहीं, शाम को पुसपाल में विहंगम सूर्यास्त का आनंद उठा सकेंगे। यह अनुभव बिल्कुल अनोखा होने वाला है। कभी यह पूरा इलाका नक्सली गतिविधियों का मुख्य केंद्र हुआ करता था। आज यहां विकास की नई पटकथा लिखी जा रही है।

कोण्डागांव के डीएफओ चूड़ामणि सिंह ने बताया, “पर्यटन क्षेत्र के विकास के साथ यहां के स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। इससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।” सूत्रों के मुताबिक, यहां एडवेंचर लवर्स के लिए राफ्टिंग, कॉटेज और कई तरह के स्पोर्ट्स की तैयारी कर ली गई है।

दो जिलों की सीमा पर होगा बड़ा काम

इस पूरे प्रोजेक्ट का खाका बेहद दिलचस्प है। इस नए पर्यटन सर्किट का 70 फीसदी विकास कोण्डागांव जिले के नारायणपुर सीमा वाले इलाके में होगा। बाकी बचा 30 फीसदी काम बस्तर जिले के अंतर्गत आने वाले कोण्डागांव वनमंडल में किया जाएगा। इसके लिए बकायदा बजट और जमीनी स्तर पर खाका तैयार हो चुका है। बहुत जल्द यहां कॉटेज बनकर तैयार हो जाएंगे।

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