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छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र

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Trips N Trippers Editorial
Published on • Raipur, India
छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र
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Quick Destination Logistics

Best Season October to March (Pleasant Central Indian Winter)
Nearest Transit Raipur Airport (RPR) & Jagdalpur Railway Station
Ideal Duration 2 Days / 1 Night

आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने ट्राइबल म्यूजियम बनाकर आदिवासी संस्कृति, सभ्यता और उनकी जीवनशैली को आमजन तक पहुँचाने के लिए अभिनव पहल की है। इसके लिए नवा रायपुर अटल नगर में करीब 10 एकड़ क्षेत्र में भव्य एवं आकर्षक आदिवासी संग्रहालय (ट्राइबल म्यूजियम) बनाया गया है। राज्य के पहले ट्राइबल म्यूजियम का लोकार्पण आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया।

मुख्यमंत्री ने लोकार्पण कार्यक्रम में सबसे पहले आदिवासी परम्परा अनुरूप मुख्य द्वार पर द्वार पूजा व श्रीफल तोड़कर नवनिर्मित ट्राइबल म्यूजियम में प्रवेश किया। वहीं प्रवेश गैलेरी में पंचतत्व के साथ प्रकृति शक्ति की पूजा करते हुए मंगलकामना की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ के निर्माता तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को धन्यवाद देते हुए कहा कि, अटल जी ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य बनाया। अटल जी के कार्यकाल में ही जनजाति विकास के लिए केन्द्र सरकार में आदिम जनजाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आदिवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान और विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के लिए पीएम जनमन योजना लागू किया है।

छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में आज आदिवासी समुदाय की द्रौपदी मूर्मु राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद को सुशोभित कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ राज्य की विशेष पहचान हमारी सुंदर जनजातीय संस्कृति से है। छत्तीसगढ़ में जनजातीय संस्कृति में विविधता है और हर जनजातीय समुदाय की अपनी विशिष्ट पहचान है। प्रदेश 43 जनजातीय समुदाय हैं और इनकी अनेकों उपजातियाँ हैं। इसके साथ ही हमारे राज्य में विशेष पिछड़ी जनजातियाँ भी हैं। जनजातीय समुदाय का सुंदर संसार, इनका खानपान, पहनावा, संगीत, लोककला, वाद्ययंत्र, नृत्य इन सबकी झलक म्यूजियम में दिखेगी। इसमें 14 गैलरी हैं और हर गैलरी एक विशेष थीम पर बनाई गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह संग्रहालय न केवल आदिवासी समाज की परंपराओं, कला और संस्कृति को संरक्षित करेगा, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगा। संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जनजातीय समुदायों की जीवनशैली, वेशभूषा, लोककला, रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताओं को दृश्य और डिजिटल माध्यमों से दर्शाया गया है।

छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र

इस म्यूजियम में जनजातीय क्षेत्रों की बहुरंगी संस्कृति की झलक दिखाई गई है। यह झलक दर्शकों को इस बात के लिए प्रेरित करेगी कि वे बस्तर और सरगुजा घूमने जाएं और जिन चीजों को उन्होंने इस म्यूजियम में महसूस किया है उसे वहां प्रत्यक्ष रूप में देख सकें।

ट्राइबल म्यूजियम के लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ट्राइबल म्यूजियम के शुभारंभ को गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी बाहुल्य प्रदेश में आदिवासी संस्कृति को और उनकी जीवन पद्धति को सबके सामने रखने के लिए ट्राइबल म्यूजियम का निर्माण हुआ है।

आदिवासी विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि अब ट्राइबल म्यूजियम में एक स्थान पर ही छत्तीसगढ़ में निवास करने वाले हर आदिवासी समुदाय के बारे में संपूर्ण जानकारी लोगों को मिल जाएगी।

ट्राइबल म्यूजियम - 14 गैलरियों में दिखेगी जनजातीय संस्कृति :

गौरतलब है कि जनजातीय संग्रहालय में कुल 14 गैलरियां हैं, जिनमें जनजातीय जीवनशैली के सभी पहलुओं का बहुत ही खूबसूरत ढ़ंग से जीवंत प्रदर्शन किया गया है। इनमें जनजातियों के भौगोलिक विवरण, तीज-त्यौहार, पर्व-महोत्सव तथा विशिष्ट संस्कृति, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, वस्त्र (परिधान) एवं आभूषण, कृषि तकनीक एवं उपकरणों, जनजातीय नृत्य, जनजातीय वाद्ययंत्रों, आग जलाने, लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई (पौधों से बीज अलग करना), कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणो व परंपरागत तकनीकों, को दर्शाया गया हैं। वहीं सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में गोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला इत्यादि, जनजातीय में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि का एवं अंतिम गैलरी में विषेष रूप से कमजोर जनजाति समूह यथा अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर एवं राज्य शासन द्वारा मान्य भुंजिया एवं पण्डो के विशेषीकृत पहलुओं का प्रदर्शन किया गया है। संग्रहालय में डिजिटल एवं एआई तकनीक के माध्यम से जनजातीय संस्कृति का भी प्रदर्शन किया गया है। क्यूआर कोड स्कैन करते ही सम्बंधित झांकी की सम्पूर्ण जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएगी।

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Frequently Asked Questions

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The ideal time to explore छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र in India is between October and March when Central India enjoys cool, pleasant daytime temperatures, making outdoor sightseeing and cultural trails very comfortable.
How do I reach छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र from Raipur? expand_more
Raipur (Swami Vivekananda Airport - RPR) serves as the primary gateway. From Raipur, well-paved national and state highways connect directly via private cabs, luxury coaches, and regional trains.
Can Trips N Trippers arrange a customized guided tour for छत्तीसगढ़ में ट्राइबल म्यूजियम बनेगा पर्यटन और शोध का बड़ा केन्द्र? expand_more
Yes, Trips N Trippers provides end-to-end bespoke itineraries including government-certified local guides, sanitized private vehicles, heritage homestays, and tribal craft workshops.
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