छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक रहे विवेक आचार्य, आईएफएस (2006) का स्थानांतरण वन विभाग में हो चुका है। पर्यटन मंडल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य के पर्यटन स्थलों के विकास, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को बड़े स्तर पर पहचान दिलाने से जुड़े कई काम आगे बढ़ाए। उनके कार्यकाल में अधोसंरचना विकास के साथ ट्राइबल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन पर भी जोर रहा।
पर्यटन अधोसंरचना के विकास पर फोकस
विवेक आचार्य के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को विकसित करने के लिए कई क्षेत्रों पर काम आगे बढ़ाया गया। पर्यटन स्थलों पर अधोसंरचना मजबूत करने, नए पर्यटन सूचना केंद्र विकसित करने, ट्राइबल टूरिज्म सर्किट तैयार करने और जनजातीय थीम पर आधारित पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
पर्यटन स्थलों पर एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ावा देने और निजी निवेश आकर्षित करने की दिशा में भी प्रयास किए गए। इसका उद्देश्य पर्यटन के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना था।
संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने की कोशिश
छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जनजातीय और लोक संस्कृति से जुड़ी है। पर्यटन विकास के साथ इस विरासत को संरक्षित करने और उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर भी ध्यान दिया गया।
बस्तर दशहरा, भोरमदेव महोत्सव, सिरपुर महोत्सव और लोक मड़ई जैसे आयोजनों को पर्यटन की दृष्टि से आगे बढ़ाने पर काम हुआ। स्थानीय तीज-त्योहारों, लोक कथाओं, साहित्य, पारंपरिक ज्ञान, संगीत और नृत्य को संरक्षण देने के साथ कलाकारों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए गए।
हस्तशिल्पियों के लिए बेहतर बाजार तैयार करने, स्थानीय खान-पान और पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित करने तथा नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने पर भी जोर रहा। इस सोच के तहत पर्यटन को सिर्फ घूमने तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली से जोड़ने का प्रयास किया गया।
फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर को मिली मंजूरी
पर्यटन अधोसंरचना से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों में माना-तूता, रायपुर में प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी और जनजातीय एवं सांस्कृतिक कन्वेंशन सेंटर शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2024-25 के तहत दोनों परियोजनाओं के लिए कुल 147.66 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसमें 95.79 करोड़ रुपये की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी और 51.87 करोड़ रुपये की लागत से जनजातीय एवं सांस्कृतिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण शामिल है।
इन परियोजनाओं से राज्य में फिल्म मेकिंग और फिल्म टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार के साथ रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
केंद्र से मंजूरी के लिए दिल्ली में की थी मुलाकात
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक के रूप में विवेक आचार्य ने 15 अक्टूबर 2024 को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से मुलाकात की थी।
इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में पर्यटन गतिविधियों की जानकारी दी और स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के तहत रायपुर में फिल्म सिटी, कन्वेंशन सेंटर, वेलनेस रिसॉर्ट और नेचर सिटी के लिए करीब 300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव रखे थे।
इसके बाद फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से 147.66 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली। इसे राज्य में पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना गया।
विजन डॉक्यूमेंट 2047 में पर्यटन और संस्कृति पर जोर
छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए राज्य नीति आयोग में विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके लिए अलग-अलग विषयों पर आठ वर्किंग ग्रुप बनाए गए।
पर्यटन से जुड़े वर्किंग ग्रुप में लघु, मध्यम और दीर्घकालिक लक्ष्यों को लेकर सुझाव दिए गए। इनमें पर्यटन स्थलों का विकास, ट्राइबल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, सांस्कृतिक आयोजन, हस्तशिल्प, लोक कला और स्थानीय परंपराओं का संरक्षण जैसे विषय शामिल रहे।
अब वन विभाग में वापस हुई सेवाएं
विवेक आचार्य की सेवाएं तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभाग वन विभाग को वापस किए जाने के बाद पर्यटन मंडल में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है।
उनके कार्यकाल में पर्यटन को अधोसंरचना, जनजातीय विरासत, संस्कृति और नए पर्यटन अनुभवों से जोड़ने की दिशा में कई पहल आगे बढ़ीं। इन योजनाओं और प्रस्तावों का असर आने वाले समय में राज्य के पर्यटन विकास पर दिखाई दे सकता है।