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Trips N Trippers / Travel News  / छत्तीसगढ़ के चंपारण्य को मिलेगी नई पहचान, 15 एकड़ में बनेगा भव्य पर्यटन परिसर
champaranya
25 Sep

छत्तीसगढ़ के चंपारण्य को मिलेगी नई पहचान, 15 एकड़ में बनेगा भव्य पर्यटन परिसर

छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को बड़ी मंजूरी मिली है। रायपुर जिले के चंपारण्य में करीब 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) ने मंजूरी दे दी है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड करेगा और इसके लिए 18 महीने की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि तय की गई है। इसका उद्देश्य चंपारण्य को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, विरासत, शैक्षणिक और अनुभव आधारित पर्यटन के समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है।

15 एकड़ में विकसित होगा पर्यटन परिसर

प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स करीब 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यहां महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। परियोजना में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास और डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे, कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

श्रद्धालुओं से लेकर विद्यार्थियों तक के लिए होगा केंद्र

परियोजना की परिकल्पना केवल धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखकर नहीं की गई है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत को समझने का अवसर मिलेगा। परिसर को परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी उपयोगी बनाने की योजना है।

चंपारण्य में बढ़ेगा पर्यटकों का ठहराव

परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना और चंपारण्य में उनके ठहराव की अवधि बढ़ाना है। योजना में सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास की संभावनाओं को ध्यान में रखा गया है। धार्मिक आयोजनों और वेलनेस गतिविधियों के दौरान पर्यटकों के अधिक अवधि तक ठहरने की संभावना भी परियोजना की योजना में शामिल है।

पर्यटन मंत्री ने बताया महत्वपूर्ण कदम

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की मंजूरी को छत्तीसगढ़ में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि चंपारण्य महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली होने के कारण छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। जन्मस्थली की धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित करने पर जोर रहेगा।

पर्यटन बोर्ड की राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर पहचान मजबूत करने की तैयारी

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने चंपारण्य परियोजना की मंजूरी को आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। परियोजना की मंजूरी के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

चंपारण्य को तीर्थ से आगे पर्यटन केंद्र बनाने की योजना

महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर के वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना के जरिए इसे केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित नहीं रखने की योजना है। आध्यात्मिकता के साथ सांस्कृतिक विरासत, शिक्षा, शोध, वेलनेस और अनुभव आधारित पर्यटन को यहां जोड़ा जाएगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान रहेगा।

डीपीआर तैयार, निविदा प्रक्रिया की तैयारी

परियोजना की डीपीआर और कार्य-सीमा तैयार है। स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। परियोजना पूरी होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शैक्षणिक और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को विस्तार मिलने की योजना है। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।