दरअसल, छत्तीसगढ़ अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक अलग और धाकड़ पहचान बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि साल 2025 में ही 800 से ज्यादा विदेशी पर्यटक छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति को करीब से देखने पहुंचे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य की अनछुई वादियों और यहां की सादगी ने विदेशों में भी धूम मचा दी है।
बस्तर में बनेगा ग्लोबल टूरिज्म हब
बता दें कि पर्यटन के मामले में बस्तर सबसे आगे निकल रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों की भव्यता विदेशी सैलानियों को बार-बार यहां खींच ला रही है। अब तो चित्रकोट के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। सरकार का मकसद साफ है चित्रकोट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी जगह बनाना जहां विदेशी पर्यटक रुक सकें और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को महसूस कर सकें।

सुरक्षा और सुकून ने बदला माहौल
हैरानी की बात यह है कि जिस बस्तर की सुरक्षा को लेकर पहले तरह-तरह की चर्चाएं होती थीं, वहां अब शांति और विकास की नई लहर है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों ने विदेशी सैलानियों का भरोसा जीत लिया है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर किर्सी ह्यवैरिनेन ने भी अपनी छह दिवसीय यात्रा के दौरान बस्तर की तारीफ करते हुए इसे विश्व के लिए एक अनूठा अनुभव बताया है।
जशपुर से मैनपाट तक का रोमांच
- मैनपाट का जादू: सरगुजा का मैनपाट अब अपने शांत और मनोहारी वातावरण की वजह से एडवेंचर टूरिज्म का केंद्र बन रहा है।
- जशपुर की वादियां: जशपुर की हरियाली और वहां की जैव विविधता प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
- सांस्कृतिक तड़का: हस्तशिल्प, पारंपरिक लोकनृत्य और छत्तीसगढ़ के उत्सवों को अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया भर में प्रमोट किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, अब छत्तीसगढ़ पर्यटकों का स्वर्ग बनने की राह पर तेजी से दौड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को और भी हाई-टेक किया जाएगा ताकि पर्यटकों को घर जैसा अनुभव मिल सके।