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30 साल बाद इंद्रावती के जंगलों में पर्यटन की तैयारी, जनवरी तक शुरू होगी सफारी; जानें क्या-क्या बदलेगा

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Trips N Trippers Editorial
Published on • Raipur, India
30 साल बाद इंद्रावती के जंगलों में पर्यटन की तैयारी, जनवरी तक शुरू होगी सफारी; जानें क्या-क्या बदलेगा

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को फिर से बढ़ावा देने की तैयारी चल रही है। करीब 2,700 वर्ग किलोमीटर में फैले इस वन क्षेत्र में जनवरी तक जंगल सफारी शुरू करने की योजना है। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण पर्यटकों की पहुंच से दूर रहे इस इलाके में अब सफारी वाहन, नेचर गाइड, होमस्टे और स्थानीय खानपान को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। इससे वनस्पतियों और वन्यजीवों पर शोध के नए रास्ते खुलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

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1981 में मिला था राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा
इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1981 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला था। वर्ष 2009 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसके क्षेत्र में 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर और 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र शामिल है। यह इलाका बस्तर की प्राकृतिक विरासत और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। घने मिश्रित पर्णपाती जंगल, पहाड़ियां, घास के मैदान और मौसमी जलधाराएं यहां के वन्यजीवों को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराती हैं।

छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बीच प्राकृतिक सीमा बनाती है इंद्रावती नदी
राष्ट्रीय उद्यान का नाम इंद्रावती नदी के नाम पर पड़ा है। नदी इसके उत्तरी और पश्चिमी हिस्से में प्राकृतिक सीमा बनाती है और छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र के बीच अंतरराज्यीय सीमा का हिस्सा भी है। इस क्षेत्र की जैव विविधता इसे केवल बाघों के संरक्षण तक सीमित नहीं रखती। यहां छत्तीसगढ़ के राज्य पशु वन भैंसे की महत्वपूर्ण प्राकृतिक आबादी पाई जाती है। इसके अलावा दुर्लभ और विलुप्तप्राय गिद्धों के साथ तेंदुआ, जंगली कुत्ता, भालू, सांभर, चीतल और जंगली सूअर जैसे वन्यजीव भी मौजूद हैं।

जनवरी तक शुरू करने की तैयारी, सफारी से बढ़ेगा आकर्षण
नक्सलवाद के कारण राष्ट्रीय उद्यान का इलाका लंबे समय तक पर्यटकों की पहुंच से बाहर रहा। अब पर्यटन को फिर से बढ़ावा देने के लिए जंगल सफारी शुरू करने की पहल की जा रही है। योजना के तहत जनवरी तक सफारी संचालन शुरू करने की तैयारी है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सफारी वाहन संचालन और नेचर गाइड जैसी सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही होमस्टे, फोटोग्राफी और स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों को भी पर्यटन से जोड़ने की तैयारी है।

पहले इस राष्ट्रीय उद्यान में विदेशी पर्यटक भी आते थे। लेकिन समय के साथ नक्सलवाद का प्रभाव बढ़ने से यह क्षेत्र पर्यटकों के साथ बीजापुर के आम लोगों की पहुंच से भी दूर होता चला गया।

मट्टी मरका रिवर बीच पर खुलेगा रेस्तरां
इंद्रावती क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना का एक हिस्सा मट्टी मरका रिवर बीच भी है। यहां रेस्तरां खोलने की तैयारी है, जहां पर्यटकों को स्थानीय व्यंजनों का स्वाद मिल सकेगा। इसके अलावा स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक खानपान को पर्यटन से जोड़ने की योजना है। इससे पर्यटकों को क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ बस्तर की स्थानीय जीवनशैली से परिचित होने का अवसर मिल सकता है।

वन्यजीवों पर शोध की संभावनाएं भी बढ़ेंगी
लंबे समय तक सीमित पहुंच के कारण इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता पर शोध करना चुनौतीपूर्ण रहा है। पर्यटन और क्षेत्र तक पहुंच से जुड़ी नई पहलों के साथ यहां की वनस्पतियों और वन्यजीवों को करीब से समझने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इंद्रावती का महत्व वन भैंसे और दुर्लभ गिद्धों जैसी प्रजातियों के संरक्षण के कारण भी है। ऐसे में यहां पर्यटन गतिविधियों के विकास के साथ वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना अहम होगा।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद
जंगल सफारी, नेचर गाइड, होमस्टे, फोटोग्राफी और स्थानीय खानपान जैसी गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं बन सकती हैं। स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा मिलने से भी इस क्षेत्र की अलग पहचान पर्यटकों तक पहुंच सकती है। फिलहाल जनवरी तक जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी है। इन योजनाओं के जमीन पर उतरने के बाद इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन, शोध और स्थानीय आजीविका के लिए नई संभावनाएं बन सकती हैं।

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