बड़े शहरों को पीछे छोड़ रहे छोटे टूरिस्ट डेस्टिनेशन; 74% नए कमरे छोटे शहरों में, आखिर क्यों बदल रही बाजार की तस्वीर?
भारत के होटल कारोबार में निवेश का रुख बदल रहा है। जनवरी से जून 2026 के बीच होटल संपत्तियों के सौदों में 4,722 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह पिछले साल की समान अवधि के करीब 1,587 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग तीन गुना है। रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म जेएलएल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस निवेश का करीब 60% हिस्सा उदयपुर, आगरा और पटना जैसे छोटे शहरों में गया। नए ब्रांडेड होटल कमरों के समझौतों में भी छोटे शहरों की हिस्सेदारी 74% रही।
होटल निवेश में बिल्डरों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
जनवरी से जून 2026 के दौरान होटल संपत्तियों के 11 सौदे हुए, जिनकी कुल कीमत 4,722 करोड़ रुपये रही। पूरे साल 2026 में होटल निवेश 10,450 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2025 के मुकाबले 94% अधिक होगा।
निवेशकों की श्रेणी में भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। होटल निवेश में डेवलपर्स यानी बिल्डरों की हिस्सेदारी 58% रही। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होटल कंपनियों ने 31% निवेश किया। वहीं, अमीर व्यक्तियों, पारिवारिक निवेश संस्थाओं और निजी होटल मालिकों की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 8.2% रह गई। पूरे साल 2025 में इस समूह की हिस्सेदारी 54% थी।
छोटे शहरों में जुड़ेंगे हजारों नए होटल कमरे
होटल कारोबार में विस्तार की तैयारी भी छोटे शहरों पर केंद्रित है। ब्रांडेड होटलों के 29,360 कमरों के लिए समझौते हुए हैं। इनमें 74% कमरे छोटे शहरों में प्रस्तावित हैं।
देशभर के मौजूदा होटलों में पहली छमाही के दौरान 5,048 नए कमरे जुड़े। इनमें भी छोटे शहरों की हिस्सेदारी 74% रही। 250 से अधिक कमरों वाले होटलों के लिए जनवरी से जून के बीच 15 समझौते हुए, जबकि पिछले साल ऐसे केवल पांच समझौते हुए थे।

ऋषिकेश, जयपुर, पटना और नवी मुंबई जैसे बाजार होटल कंपनियों की विस्तार योजनाओं में शामिल हैं। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि होटल समूह छोटे शहरों में भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।
लग्जरी होटलों में निवेशकों की ज्यादा दिलचस्पी
छोटे शहरों में होटल निवेश केवल कारोबारी यात्रियों की जरूरतों तक सीमित नहीं है। केरल और कुर्ग के लग्जरी रिसॉर्ट, आगरा, मसूरी और नोएडा के लग्जरी होटल तथा उदयपुर और जयपुर की प्रीमियम संपत्तियां भी निवेश सौदों का हिस्सा रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल होटल निवेश में लग्जरी संपत्तियों की हिस्सेदारी 51% रही। इसके मुकाबले किफायती श्रेणी के होटलों को केवल 2% निवेश मिला। इससे पता चलता है कि निवेशकों की दिलचस्पी प्रीमियम होटल संपत्तियों में ज्यादा रही।
दिवालिया प्रक्रिया वाली संपत्तियों में भी बड़ा निवेश
होटल निवेश में तेजी के पीछे वित्तीय संकट से गुजर रही संपत्तियों की खरीद भी एक बड़ा कारण रही। पहली छमाही में दिवालिया कानून के तहत हुए होटल सौदों का मूल्य करीब 28.8 करोड़ डॉलर यानी 2,745 करोड़ रुपये रहा। यह कुल निवेश का लगभग 58% है।
ऐसी संपत्तियों की खरीद में निवेशकों को कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल सकता है, लेकिन इसकी सफलता संपत्ति की वास्तविक स्थिति, उस पर मौजूद देनदारियों और उसे सुधारने में आने वाली लागत पर निर्भर करती है।
छोटे शहरों में होटल कारोबार क्यों बढ़ रहा है?
छोटे शहरों में होटल निवेश बढ़ने के पीछे पर्यटन की बदलती मांग एक अहम वजह है। घरेलू पर्यटक अब बड़े शहरों के साथ प्रकृति, स्थानीय संस्कृति और नए अनुभवों के लिए ऋषिकेश, कुर्ग और उदयपुर जैसे स्थलों का भी रुख कर रहे हैं।
उभरते बाजारों में निवेशकों को संपत्तियों की कीमत और भविष्य में होने वाली कमाई के लिहाज से अवसर दिखाई दे रहे हैं। पहले से संचालित होटल खरीदने का एक फायदा यह भी है कि निवेशक को ग्राहक जुटाने और कारोबार स्थापित करने की शुरुआत शून्य से नहीं करनी पड़ती।
ब्रांडेड होटल कंपनियों का विस्तार भी इस बदलाव का संकेत है। नए कमरों के लिए हुए समझौतों में छोटे शहरों की 74% हिस्सेदारी बताती है कि होटल समूह इन बाजारों में भविष्य की मांग को लेकर संभावनाएं देख रहे हैं।
2026 में होटल निवेश 10,450 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान
जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में होटल संपत्तियों में कुल निवेश 10,450 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह 2025 के मुकाबले 94% ज्यादा होगा। पहली छमाही के आंकड़ों में छोटे शहरों, लग्जरी संपत्तियों और दिवालिया प्रक्रिया के तहत खरीदे गए होटलों की अहम भूमिका सामने आई है।
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