धुड़मारास बनेगा ग्लोबल टूरिज्म विलेज
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले का एक छोटा सा गांव धुड़मारास अब दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर चमकने के लिए तैयार है। संयुक्त राष्ट्र (UN) से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय पर्यटन विशेषज्ञ किर्सी ह्यवैरिनेन 23 से 28 फरवरी तक बस्तर के विशेष दौरे पर आ रही हैं। यह 6 दिवसीय प्रवास न केवल धुड़मारास बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण पर्यटन के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होने वाला है।
अब सात समंदर पार पहुंचेगी बस्तर की संस्कृति
बस्तर के लिए यह दौरा किसी बड़े निवेश से कम नहीं है। संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UN Tourism) के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के लिए दुनिया भर के 60 देशों में से केवल 20 गांवों को चुना गया है, जिनमें धुड़मारास ने अपनी जगह बनाई है। यह अंतरराष्ट्रीय मेंटरशिप स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे संचालक और हस्तशिल्प के क्षेत्र में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा करेगी।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर तैयार होगा धुड़मारास मॉडल
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और जिला प्रशासन बस्तर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दौरे का मुख्य उद्देश्य धुड़मारास को एक ‘सेल्फ-सस्टेनेबल’ यानी आत्मनिर्भर पर्यटन केंद्र बनाना है। किर्सी ह्यवैरिनेन अपने 6 दिनों के प्रवास के दौरान गांव की भौगोलिक स्थिति, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय संसाधनों का गहन अध्ययन करेंगी।
विशेषज्ञ की शुरुआत जगदलपुर आगमन से होगी, जिसके बाद वे चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता को देखेंगी। उनके शेड्यूल में तीरथगढ़ जलप्रपात और कोटमसर गुफा जैसी प्राकृतिक धरोहरों का निरीक्षण भी शामिल है। यह दौरा महज घूमने के लिए नहीं, बल्कि इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की पसंद के अनुसार ढालने के लिए एक तकनीकी सर्वे की तरह होगा।
होम-स्टे और सामुदायिक भागीदारी पर जोर
धुड़मारास की सबसे बड़ी ताकत वहां का सामुदायिक जुड़ाव है। किर्सी अपने प्रवास के दौरान धुर्वा डेरा होम स्टे में रुकेंगी। यहाँ वे स्थानीय ग्रामीणों के साथ रहकर उनके पारंपरिक खान-पान, आतिथ्य सत्कार और दैनिक जीवनशैली को करीब से महसूस करेंगी।
उनका मुख्य ध्यान ऑन-साइट मेंटरशिप पर होगा, जिसमें वे स्थानीय हितधारकों को समझाएंगी कि कैसे अपनी संस्कृति से समझौता किए बिना विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। वे बांस हस्तशिल्प के कारीगरों के साथ एक विशेष वर्कशॉप भी करेंगी, ताकि उनके उत्पादों को ‘ग्लोबल फिनिशिंग’ दी जा सके और उनकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हो। बता दें कि कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित होने के कारण धुड़मारास ईको-टूरिज्म का भी एक बेहतरीन केंद्र है।