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13 Apr

छत्तीसगढ़ के 5 बड़े मंदिरों की बदलेगी सूरत: सरकार शुरू कर रही आस्था पथ योजना

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। छत्तीसगढ़ आस्था पथ योजना के जरिए अब प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों को एक सर्किट के रूप में जोड़ा जाएगा। इसके लिए शुरुआती तौर पर 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे डोंगरगढ़ से लेकर दंतेवाड़ा तक के मंदिरों का कायाकल्प होगा।

इन 5 मंदिरों को मिलाकर बनेगा शक्तिपीठ सर्किट

दरअसल, सरकार का मुख्य फोकस उन पांच पावन स्थलों पर है, जहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस प्रोजेक्ट के तहत 5 मंदिरों में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

  • चंद्रपुर: चंद्रहासिनी देवी मंदिर (सक्ती)
  • डोंगरगढ़: बम्लेश्वरी देवी मंदिर (राजनांदगांव)
  • दंतेवाड़ा: दंतेश्वरी देवी मंदिर
  • रतनपुर: महामाया देवी मंदिर (बिलासपुर)
  • कुदरगढ़: कुदरगढ़ी माता मंदिर (सूरजपुर)
इसके लिए शुरुआती तौर पर 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे डोंगरगढ़ से लेकर दंतेवाड़ा तक के मंदिरों का कायाकल्प होगा।

मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों के लिए सरकार ने तैयारी की है। बौद्ध नगरी सिरपुर के कायाकल्प के लिए 36 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट रखा गया है। छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए 350 करोड़ रुपये की लागत से फिल्म सिटी और ट्राइबल कल्चरल कन्वेंशन सेंटर बनाया जा रहा है। धमतरी के कोपरा जलाशय (रामसर साइट) को अब इंटरनेशनल लेवल पर इको-टूरिज्म स्पॉट के रूप में विकसित किया जाएगा।

गौरतलब है कि पर्यटन विभाग का यह कदम सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी प्रदेश को मजबूत करेगा। अधिकारियों का मानना है कि शक्तिपीठ सर्किट बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में 30-40% की बढ़ोतरी होगी।