27
Jul
‘हमु काका बाबा ना पोरिया रे’ जानें कैसे आदिवासी विरासत का प्रतीक बना यह लोकगीत
भारत की लोक संस्कृति अपनी विविधता और समृद्ध परंपराओं के लिए दुनिया भर में जानी जाती है। अलग-अलग राज्यों की अपनी लोकभाषाएं, लोकनृत्य और लोकगीत हैं। इन्हीं में से एक है 'हमु काका बाबा ना पोरिया रे', जो आज सोशल मीडिया की वजह से देशभर में लोकप्रिय हो चुका है। हालांकि, यह गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। कहां से आया हमु काका बाबा ना पोरिया रे? यह पारंपरिक लोकगीत पश्चिम भारत के आदिवासी क्षेत्रों से जुड़ा है।...