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Trips N Trippers / Travel News  / कौन हैं सांवलिया सेठ, जिनके दरबार में चढ़ता है करोड़ों का चढ़ावा?
sawaliya seth
17 Sep

कौन हैं सांवलिया सेठ, जिनके दरबार में चढ़ता है करोड़ों का चढ़ावा?

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित श्री सांवलियाजी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर अर्जी लगाते हैं और पूरी होने पर अपनी श्रद्धा के अनुसार सोना, चांदी, नकदी और दूसरी भेंट चढ़ाते हैं।

आखिर कौन हैं सांवलिया सेठ?

सांवलिया सेठ भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप के रूप में पूजे जाते हैं। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में सांवलियाजी का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां भक्त अपनी अलग-अलग मनोकामनाओं को लेकर भगवान के दरबार में अर्जी लगाने की मान्यता रखते हैं।

मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु अपनी इच्छा और श्रद्धा के अनुसार भगवान को भेंट चढ़ाते हैं। मंदिर में चांदी, सोने और रत्न जड़ित प्रतीक चढ़ाने की परंपरा भी देखने को मिलती है। कई श्रद्धालु अपनी ओर से दी गई भेंट को सार्वजनिक नहीं करते।

सांवलिया सेठ से मांगी थी थार

उदयपुर जिले के भींडर निवासी सूरजमल यादव का मार्बल फिटिंग और पॉलिश का व्यवसाय है। वह पहले सांवलियाजी मंदिर में ठेके पर काम भी कर चुके हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने सांवलियाजी कस्बे के पास एक निजी कॉलोनी में 11 लाख 51 हजार रुपए का भूखंड खरीदा था। कॉलोनाइजर की ओर से ईनामी कूपन योजना शुरू की गई थी। भूखंड की राशि जमा कराने के बाद सूरजमल को लकी ड्रॉ का कूपन मिला।

इस कूपन में प्रथम पुरस्कार स्कॉर्पियो रखा गया था। इसके अलावा भी कई दूसरे पुरस्कार थे। सूरजमल कूपन लेकर सीधे सांवलियाजी मंदिर पहुंचे। उन्होंने सांवलिया सेठ से थार कार मिलने की अर्जी लगाई। सूरजमल ने अपनी प्रार्थना के बारे में बताते हुए कहा, “मैं सुदामा हूं, जो भी अर्जी लगाई वो सुनी, इस अर्जी को भी सुनो।”

थार की जगह स्कॉर्पियो निकली

लकी ड्रॉ का परिणाम आया तो सूरजमल की किस्मत में थार नहीं, बल्कि स्कॉर्पियो निकली। कॉलोनाइजर की ओर से उन्हें स्कॉर्पियो का बेस मॉडल मिला। इसकी कीमत करीब 13.51 लाख रुपए बताई जा रही है। मनोकामना पूरी होने के बाद सूरजमल ने सांवलिया सेठ के दरबार में अपनी ओर से भेंट चढ़ाने का फैसला किया।

चांदी की स्कॉर्पियो और 5.51 लाख रुपए चढ़ाए

रविवार को सूरजमल अपने परिवार के साथ श्री सांवलियाजी मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान को चांदी की स्कॉर्पियो और 5 लाख 51 हजार रुपए नकद भेंट किए। भेंट चढ़ाने के बाद उन्होंने एक वाटिका में प्रसादी का आयोजन भी किया। मंदिर के पुजारी और स्टाफ समेत करीब 500 स्थानीय लोगों को भोजन कराया गया।

अर्जी पूरी होने पर भेंट चढ़ाने की मान्यता

सांवलिया सेठ के दरबार में मनोकामना लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बड़ी है। मान्यता है कि जब किसी भक्त की अर्जी पूरी हो जाती है तो वह अपनी श्रद्धा के मुताबिक भगवान को भेंट चढ़ाता है। इसी परंपरा के तहत मंदिर में अलग-अलग तरह की भेंट पहुंचती रहती हैं। कोई चांदी का प्रतीक चढ़ाता है तो कोई नकद राशि। सूरजमल की चांदी की स्कॉर्पियो भी इसी आस्था से जुड़ी भेंट है।

सूरजमल की कहानी में खास बात यह रही कि उन्होंने भगवान से थार की अर्जी लगाई थी, लेकिन लकी ड्रॉ में स्कॉर्पियो निकली। इसके बाद उन्होंने स्कॉर्पियो की चांदी की प्रतिकृति और 5.51 लाख रुपए सांवलिया सेठ के चरणों में अर्पित कर दिए।