भोरमदेव में शुरू हुआ 6 किमी लंबा इको ट्रेल, पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई उड़ान
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव अभ्यारण्य अब इको-टूरिज्म का नया केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने हाल ही में आयोजित वन महोत्सव के दौरान भोरमदेव में 6 किलोमीटर लंबे इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ इस ट्रेल का भ्रमण कर प्रकृति की गोद में जंगल की सुंदरता का अनुभव लिया।
पर्यटन से बदलेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र अपनी प्राकृतिक संपदा के लिए जाना जाता है। जंगल सफारी के बाद इको ट्रेल की शुरुआत पर्यटकों के लिए एक नया रोमांच लेकर आई है। उन्होंने जोर दिया कि पर्यटन दुनिया का सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। जब यहाँ सैलानियों की संख्या बढ़ेगी, तो उसका सीधा लाभ होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय खान-पान के व्यवसायों को मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने स्थानीय युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी इस प्राकृतिक धरोहर को सहेजने में अपनी भूमिका निभाएं।

स्वदेश दर्शन योजना से कायाकल्प
भोरमदेव के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना’ के तहत 146 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि से प्रवेश द्वार, आधुनिक पार्क, संग्रहालय और छेरकी महल व मड़वा महल जैसे ऐतिहासिक स्थलों का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर भोरमदेव राष्ट्रीय मानचित्र पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में उभरेगा।
क्या है इको ट्रेल की खासियत?
यह ट्रेल करीब 6 किलोमीटर लंबी है, जिसे तय करने में 3 से 4 घंटे का समय लगता है। यह हर शनिवार और रविवार को संचालित की जाएगी। करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव इको कैंप से शुरू होने वाली इस यात्रा में पर्यटकों को प्रशिक्षित नेचर गाइड के माध्यम से दुर्लभ वनस्पतियों, औषधीय पौधों, पक्षियों और वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका मिलेगा। इसके लिए प्रति व्यक्ति 1,000 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
वन महोत्सव और जन-कल्याणकारी पहल
इस कार्यक्रम के दौरान वन महोत्सव का आयोजन भी किया गया। उप मुख्यमंत्री ने ‘काला आम उपवन’ की स्थापना के लिए 51 पौधों का रोपण किया और जिले में 50 हजार सीड बॉल लगाने के अभियान की शुरुआत की। साथ ही, बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट वितरित किए गए। ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया। इस मौके पर क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।