छत्तीसगढ़ में धरोहरों की हिफाजत के साथ Tourism का नया मॉडल, छत्तीसगढ़ में ASI के साथ हुआ समझौता
छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए Heritage Tourism को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI), भारत सरकार और संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ। इसके तहत प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं और अधोसंरचना विकसित की जाएगी।
पर्यटकों के लिए तैयार होंगी सुविधाओं की योजनाएं
समझौते के तहत छत्तीसगढ़ शासन, ASI के अधिकारियों के परामर्श से संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं की योजनाएं तैयार करेगा। इसका उद्देश्य इन स्थलों पर आने वाले लोगों को बेहतर और सुविधाजनक पर्यटन अनुभव देना है। इन योजनाओं में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग और क्लॉक रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज भी विकसित किए जाएंगे।
ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे भी बनेंगे
समावेशी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए पुरातात्विक स्थलों पर ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा लैंडस्केपिंग और पर्यटकों की जरूरत के मुताबिक दूसरी अधोसंरचनाएं भी विकसित की जा सकेंगी।
स्मारकों का मूल स्वरूप नहीं बदलेगा
विकास कार्यों के दौरान ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्मारकों की मौलिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। डिजाइन, निर्माण सामग्री और संरचना इस तरह तय होगी कि स्मारकों को किसी तरह की क्षति न पहुंचे। सभी कार्य पुरातत्त्वीय अधिनियमों और नियमों के अनुसार किए जाएंगे। किसी परियोजना को लागू करने से पहले भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति लेना जरूरी होगा।
केंद्र से लेकर CSR और PPP तक जुटेंगे संसाधन
पर्यटक सुविधाओं और अधोसंरचना के विकास के लिए अलग-अलग माध्यमों से संसाधन जुटाए जा सकेंगे। इसमें केंद्रीय वित्तीय सहायता के अलावा राज्य शासन की एजेंसियां, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) शामिल हैं। विकसित सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन या शासन की ओर से अधिकृत एजेंसी की होगी।
योजना एवं क्रियान्वयन समिति रखेगी नजर
परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन की निगरानी के लिए योजना एवं क्रियान्वयन समिति का गठन किया जाएगा। समिति विकास योजनाओं से लेकर उनके क्रियान्वयन और प्रबंधन तक अलग-अलग चरणों की निगरानी करेगी। इस व्यवस्था के जरिए पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं के विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर रहेगा।
MoU पर इन अधिकारियों ने किए हस्ताक्षर
MoU के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक के प्रतिनिधि के रूप में मध्य क्षेत्र के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज और रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु मौजूद रहे। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन की ओर से संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी भी इस दौरान उपस्थित रहे।