छत्तीसगढ़ की मनोहारी पर्यटन छटा से अभिभूत हुए, पूर्व पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार
छत्तीसगढ़ अब भारत के पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक मीनाक्षी शर्मा ने राज्य का विस्तृत भ्रमण किया। उन्होंने अपनी 14 दिवसीय यात्रा के बाद छत्तीसगढ़ को देश का सबसे मौलिक पर्यटन गंतव्य बताया है।
14 दिन की यात्रा और छत्तीसगढ़ का वैभव
श्रीमती शर्मा ने अपनी यात्रा रायपुर से शुरू की थी। उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन और जनजातीय संग्रहालय में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देखा। इसके बाद, उन्होंने कबीरधाम जिले के भोरमदेव मंदिर का दौरा किया। उन्होंने इस मंदिर को भारतीय स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण बताया है।
अमरकंटक में उन्होंने मां नर्मदा के उद्गम स्थल के दर्शन किए। साथ ही, उन्होंने रतनपुर की मां महामाया शक्तिपीठ में भी मत्था टेका। उनके अनुसार, यह राज्य प्रकृति और आध्यात्मिकता का एक दुर्लभ संगम है।

बस्तर की खूबसूरती और विश्व स्तरीय पहचान
श्रीमती शर्मा ने अपनी यात्रा का बड़ा हिस्सा बस्तर में बिताया। उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात की विशालता और सुंदरता की खुलकर तारीफ की। इसके अलावा, उन्होंने टाटामारी घाटी और कोंडागांव के शिल्प ग्राम का भी अनुभव लिया।
उनकी नजर में बस्तर की जनजातीय कला विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ने में सक्षम है। दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ और बारसूर के प्राचीन मंदिरों ने उन्हें बेहद प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान साहसिक पर्यटकों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।
पर्यटन विकास की असीमित संभावनाएं
श्रीमती शर्मा का मानना है कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के लिए काफी संभावनाएं छिपी हैं। यदि कम चर्चित पर्यटन स्थलों का सही ढंग से प्रचार हो, तो यह राज्य अग्रणी बन सकता है। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को उन्होंने सराहा है।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर्यटन को नई ऊंचाई पर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की शांति और आत्मीय आतिथ्य पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करेगा।