छत्तीसगढ़ में पर्यटन का बदला ट्रेंड! इन 5 नए धार्मिक केंद्रों पर पहले ही साल पहुंचे 95 लाख से ज्यादा पर्यटक
छत्तीसगढ़ में पर्यटन की तस्वीर तेजी से बदल रही है और धार्मिक स्थल पर्यटकों की पसंद में आगे आते दिख रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर कुल 4.05 करोड़ यात्राएं दर्ज की गईं। इनमें अकेले राजिम और डोंगरगढ़ में 1.96 करोड़ यात्राएं हुईं। यानी प्रदेश में दर्ज करीब हर दूसरी पर्यटन यात्रा इन दोनों धार्मिक स्थलों तक पहुंची।

धार्मिक पर्यटन का दायरा सिर्फ राजिम और डोंगरगढ़ तक सीमित नहीं रहा। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने वर्ष 2025 में पांच नए धार्मिक केंद्रों को पर्यटन केंद्रों की सूची में शामिल किया। इनमें कौशल्या माता मंदिर चंदखुरी, शिवरीनारायण, गिरौदपुरी धाम, कुदरगढ़ और चंद्रहासिनी मंदिर चंद्रपुर शामिल हैं। इन पांचों जगहों पर पहले ही साल 95 लाख से ज्यादा यात्राएं दर्ज की गईं।

पहली बार सूची में शामिल हुए 5 धार्मिक केंद्र
नए धार्मिक केंद्रों में बढ़ा फुटफॉल छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है। टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में इन पांच केंद्रों पर यात्राओं का आंकड़ा एक करोड़ के पार जा सकता है।
बढ़ती संख्या को देखते हुए इन स्थानों पर पर्यटक सुविधाओं के विस्तार की तैयारी भी की जा रही है। कौशल्या धाम में बने कॉटेज को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए जल्द टेंडर जारी करने की तैयारी है। दूसरे धार्मिक केंद्रों पर भी सुविधाएं और बुनियादी ढांचा बढ़ाने की योजना है।
एक साल में 90 लाख बढ़ीं पर्यटन यात्राएं
छत्तीसगढ़ में पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों की संख्या में एक साल में बड़ा इजाफा हुआ है। टूरिज्म बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर 3.15 करोड़ यात्राएं दर्ज हुई थीं। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 4.05 करोड़ हो गई।
इस तरह एक साल में 90 लाख यात्राओं की बढ़ोतरी हुई। यह करीब 28.6 फीसदी की वृद्धि है। उपलब्ध पिछले सात वर्षों के आंकड़ों में 2025 की संख्या सबसे बड़ी वार्षिक संख्या रही।
राजिम में 1.12 करोड़ यात्राएं
प्रमुख पर्यटन केंद्रों में राजिम और डोंगरगढ़ सबसे आगे रहे। राजिम में वर्ष 2024 में 78 लाख यात्राएं दर्ज हुई थीं। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.12 करोड़ हो गया। यानी एक साल में राजिम में 34 लाख यात्राओं की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
डोंगरगढ़ भी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल रहा। इसके अलावा रायपुर, दंतेवाड़ा, चित्रकोट, मैनपाट और सिरपुर जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे।
अब अनुभव आधारित पर्यटन पर जोर
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ाने के लिए अब अनुभव आधारित पर्यटन, होमस्टे, राम वन गमन परिपथ, जनजातीय और ईको टूरिज्म पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पीपीपी के जरिए निजी निवेश बढ़ाने पर भी जोर है।
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के एमडी सौमिल रंजन चौबे के मुताबिक, लक्ष्य पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ाने के साथ उनके खर्च को भी बढ़ाना है। इसके लिए पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर काम किया जा रहा है।