सीएसआर फंड से जंगलों में विकसित होंगे नए प्रोजेक्ट, इको-टूरिज्म में बढ़ेगा निवेश
छत्तीसगढ़ में अब वन विभाग कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से जंगलों में नए विकास कार्य शुरू करेगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल वन क्षेत्रों का संरक्षण करना है, बल्कि इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी तैयार करना है।

वन विभाग द्वारा राज्य की प्रमुख खनन एवं औद्योगिक कंपनियों के समक्ष एक प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें बताया गया कि CSR राशि का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में प्रभावी रूप से किया जा सकता है। प्रस्तावित परियोजनाओं में जंगलों में बुनियादी सुविधाओं का विकास, पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, संरक्षण कार्य तथा स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका सृजन शामिल हैं।
अरण्य भवन में आयोजित बैठक में माननीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि CSR केवल धन खर्च करने का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव आना चाहिए। उन्होंने कंपनियों से आग्रह किया कि परियोजनाएं स्थानीय आवश्यकताओं, सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों और भौगोलिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान में CSR के तहत पर्यावरण, वन संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन से जुड़े कार्यों में निवेश अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि संरक्षण और विकास के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंपनियों को परियोजनाओं की पहचान, तकनीकी सहयोग और क्रियान्वयन में पूरा समर्थन दिया जाए। बैठक में राज्य सरकार के CSR मॉनिटरिंग पोर्टल की भी जानकारी साझा की गई, जिसके माध्यम से कंपनियों और एजेंसियों को अपनी CSR परियोजनियों की निगरानी एवं अपडेट सुनिश्चित करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि CSR आधारित इन पहलों से छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी और राज्य की प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।