रायपुर से बस्तर तक बदलेगी छत्तीसगढ़ की सूरत
टाटा ग्रुप करेगा ₹500 करोड़ का निवेश छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का दौर अब खत्म हो चुका है। अब बस्तर और सरगुजा के जंगलों में गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि फाइव स्टार मेहमाननवाजी दिखेगी। देश का सबसे बड़ा बिजनेस घराना यानी टाटा ग्रुप अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन को पूरी तरह बदलने आ रहा है। टाटा की होटल कंपनी 'आईएचसीएल' (IHCL) राज्य में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बड़ा निवेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ हुई एक हाई-लेवल बैठक में टाटा के अफसरों ने खुद इस बड़े प्लान को...
Chhattisgarh to Host ADTOI National Tourism Summit in Raipur This December
The Association of Domestic Tour Operators of India (ADTOI) has chosen Raipur, Chhattisgarh, as the host city for its highly anticipated Annual Convention 2026. The major travel industry event is locked in for December 12th and 13th, 2026. Making the announcement during a hybrid General House Meeting, ADTOI President Mr. Ved Khanna highlighted that the convention will act as a major catalyst for the region. Beyond putting a spotlight on local travel destinations, the event is built to create robust networking channels and actively boost domestic footfall. It will function as...
बस्तर का मांझीपाल बना छत्तीसगढ़ का नया इको-टूरिज्म हब
प्रकृति की अनुपम छटा, जनजातीय संस्कृति की आत्मीयता और रोमांच से सराबोर बस्तर अंचल का खूबसूरत ग्राम मांझीपाल आज छत्तीसगढ़ के सबसे तेजी से उभरते इको-टूरिज्म केंद्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित यह मनोरम स्थल अपने घने जंगलों, स्वच्छ कांगेर नदी और ग्रामीण परिवेश की सादगी के कारण देश-विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा बस्तर में इको-टूरिज्म, ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए की गई विशेष पहल का ही परिणाम है...
छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के सचिव एस. भारतीदासन की समीक्षा बैठक
हैरिटेज और इको-टूरिज्म पर विशेष जोर छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई गति और वैश्विक पहचान देने की दिशा में पर्यटन विभाग के नवनियुक्त सचिव एस. भारतीदासन ने मंगलवार को मंत्रालय (महानदी भवन, नवा रायपुर) के मंथन हॉल में विभागीय योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। सचिव के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी पहली विभागीय बैठक थी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य (IFS) सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य में संचालित पर्यटन परियोजनाओं, अधोसंरचना विकास, पर्यटन स्थलों के उन्नयन, पर्यटक सुविधाओं...
मरवाही में सफेद भालू का खौफ: आमादांड में ग्रामीण पर किया हमला
मरवाही के जंगलों में इन दिनों एक अजीब और बेहद दुर्लभ नजारा देखने को मिल रहा है। यहां काले भालुओं के बीच एक बिल्कुल सफेद रंग का भालू घूमता दिखाई दिया है। इसे देखकर इलाके के लोग हैरान भी हैं और डरे हुए भी हैं। यह अनोखा भालू आमादांड गांव के पास देखा गया है। जैसे ही लोगों को पता चला कि जंगल में सफेद भालू आया है, आस-पास के गांवों से भीड़ लग गई। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर मोबाइल से उसकी फोटो खींचने और सेल्फी लेने पहुंच रहे...
रुद्री में साकार होगा आस्था और आधुनिकता का अद्भुत संगम
धमतरी शहर से लगे रुद्री स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर अब केवल एक धार्मिक स्थल भर नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभरेगा। लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित रुद्रेश्वर धाम कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से मंदिर परिसर का समग्र विकास किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से तीन चरणों में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। विशेष बात यह है कि पूरे विकास कार्य...
देवरानी-जेठानी मंदिर- पत्थरों पर जीवंत इतिहास और रहस्यमयी शिल्प का संगम
छत्तीसगढ़ की हृदयस्थली में बिलासपुर जिले में बसा ताला केवल एक पुरातत्व स्थल नहीं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला की उस पराकाष्ठा का प्रमाण है, जहाँ पत्थर बोलते हैं। रायपुर-बिलासपुर राजमार्ग पर मनियारी नदी के तट पर स्थित देवरानी-जेठानी मंदिर अपनी अद्वितीय मूर्तिकला और रहस्यमयी रूद्र शिव प्रतिमा के कारण दुनिया भर के इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। मनियारी के तट पर गुप्तकालीन वैभव बिलासपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर ताला गांव में स्थित ये दो शिव मंदिर लगभग 1500 वर्ष पुराने (छठवीं-सातवीं शताब्दी) माने जाते हैं।...
दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी मंदिर, जनजातीय परंपरा और सनातन आस्था का प्रतीक
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी अंचल बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक चेतना का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र दंतेवाड़ा स्थित दंतेश्वरी मंदिर। शंखिनी और डंकिनी नदियों के पवित्र संगम तट पर स्थित यह मंदिर केवल श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय परंपराओं का जीवंत दस्तावेज भी है। देवी दंतेश्वरी को संपूर्ण बस्तर अंचल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है और यह मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया और भगवान...
जशपुर के दुलदुला का कमाल: कचरे से बन रही शानदार चीजें, अब ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल देखने पहुंच रहे लोग
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले ने स्वच्छता और सृजनात्मकता की एक नई इबारत लिखी है। दुलदुला जनपद पंचायत के पास विकसित किया गया इको पार्क आज न केवल आकर्षण का केंद्र है, बल्कि वेस्ट टू बेस्ट (कबाड़ से जुगाड़) की अवधारणा को सार्थक करने वाला एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। अनुपयोगी कचरे को सौंदर्य में बदलकर इस पार्क ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज की सोच को नई दिशा दी है। प्रमुख आकर्षण कचरे में बसी कला इस पार्क की सबसे बड़ी शक्ति इसकी निर्माण शैली है। यहाँ उन वस्तुओं को जीवन...
500 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत का डिजिटल संरक्षण- पेंड्रा में मिलीं दुर्लभ पांडुलिपियां
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। पेंड्रा नगर की पुरानी बस्ती में सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों और दस्तावेजों को खोज निकाला गया है, जिन्हें अब डिजिटल माध्यम से भविष्य के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। दो प्रमुख स्थानों से अमूल्य धरोहरें प्राप्त सर्वेक्षण दल को पेंड्रा के वार्ड क्रमांक 4 में दो प्रमुख स्थानों से अमूल्य धरोहरें प्राप्त हुई हैं। 500 वर्ष पुरानी अथ श्रीमद्भागवत गीता पंडित मोहन दत्त शर्मा के निवास...