आगोरा ईको-टूरिज़्म को ‘इंडियन रिस्पॉन्सिबल टूरिज़्म नेशनल अवार्ड्स 2025’ में स्वर्ण पदक
आगोरा ईको-टूरिज़्म ने 'इंडियन रिस्पॉन्सिबल टूरिज़्म नेशनल अवार्ड्स 2025' में सस्टेनेबल ट्रैवल एंटरप्राइज़ श्रेणी में गोल्ड (प्रथम स्थान) प्राप्त किया है। यह सम्मान देशभर में जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिष्ठित Outlook Traveller द्वारा प्रदान किया गया है। आगोरा ईको-टूरिज़्म की स्थापना 2022 में छत्तीसगढ़ में अनुभवात्मक पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। इसका मुख्य लक्ष्य स्थानीय समुदायों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना था, ताकि वे होमस्टे, गाइड, भोजन तैयारी, ट्रेकिंग, कहानी कहने या अन्य उपयुक्त भूमिकाओं में पर्यटन का हिस्सा बन सकें।...
बस्तर में इको-टूरिज्म को नई उड़ान
छत्तीसगढ़ का बस्तर अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। अब यहां के तीरथगढ़ और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पास स्थित मांझीपाल में बैंबू राफ्टिंग की शुरुआत की गई है, जो बस्तर में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए द्वार खोल रही है। यह पहल इको-डेवलपमेंट समिति द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के सहयोग से शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य रोमांचक पर्यटन और सतत विकास को एक साथ आगे बढ़ाना है। बस्तर में इको-टूरिज्म :- प्रकृति के बीच रोमांच का नया...
टीपापानी पहाड़ पर मिले मध्य पाषाणकालीन शैलचित्र
रायगढ़, छत्तीसगढ़। रायगढ़ जिले के केरसार गांव स्थित टीपापानी पहाड़ पर हाल ही में मध्य पाषाणकाल (10,000-4,000 ई.पू.) के शैलचित्रों की खोज की गई है। यह ऐतिहासिक खोज डॉ. मुकेश कुमार राठिया, मानवविज्ञान अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा की गई है। शैलचित्रों में जीवन और प्रकृति की झलक डॉ. राठिया के अनुसार, इन शैलचित्रों में मानव एवं पशु आकृतियों के साथ-साथ पेड़-पौधे और अन्य दृश्य भी दर्शाए गए हैं। ये चित्र तत्कालीन मानव जीवन और उनके परिवेश के विकास की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। रायगढ़ के शैलचित्र: सांस्कृतिक और ऐतिहासिक...
छत्तीसगढ़ के पांच शक्तिपीठ बनेंगे चार धाम की तर्ज पर
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश के प्रमुख पांच शक्तिपीठ को चार धाम की तर्ज पर विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इसमें सूरजपुर के कुदरगढ़, सक्ति के चंद्रहासिनी चंद्रपुर, बिलासपुर के महामाया रतनपुर, दंतेवाड़ा के दंतेश्वरी मंदिर, और राजनांदगांव के डोंगरगढ़ स्थित मां बमलेश्वरी मंदिर को शामिल किया गया है। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा प्रदेश के इन प्रमुख शक्तिपीठों को भव्य और सुव्यवस्थित चार धाम रूप देने के लिए विशेष योजना बनाई गई है।...
मधेश्वर पहाड़ शिवलिंग जशपुर का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। जशपुर जिले के प्रसिद्ध मधेश्वर पहाड़ की अद्भुत प्राकृतिक संरचना, जो विश्व की सबसे बड़ी शिवलिंग के रूप में पहचानी जाती है, को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। इसे "लार्जेस्ट नेचुरल फैक्सिमिली ऑफ शिवलिंग" का खिताब मिला है। मधेश्वर पहाड़ शिवलिंग - सीएम विष्णु देव साय ने दी बधाई इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ट्वीट कर कहा, बधाई...
वैश्विक पर्यटन नक्शे पर शामिल हुआ छत्तीसगढ़ का जशपुर
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर अपनी खास जगह बना चुका है। इसे पर्यटन वेबसाइट www.easemytrip.com में शामिल किया गया है, जो इसे राज्य का पहला ऐसा जिला बनाता है। अब देश-विदेश के पर्यटक आसानी से जशपुर की सुंदरता और पर्यटन स्थलों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री की बधाई और पर्यटन की नई दिशा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा:"जशपुर का वैश्विक पर्यटन नक्शे में शामिल होना हर छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का विषय है। हमारी सरकार राज्य...
पर्यटन के क्षेत्र में जशपुर की नई पहचान
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में, पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मायली नेचर कैंप में सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की बैठक आयोजित की गई। यह पहल न केवल जिले को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने का प्रयास है, बल्कि इसे सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के लिए भी वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक कदम है। जशपुर: प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर...
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को उद्योग का दर्जा: नए रोजगार और निवेश के अवसर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस फैसले का उद्देश्य राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना और योजनाबद्ध विकास को सुनिश्चित करना है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा: क्या है खास? कैबिनेट की इस बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के प्रस्ताव पर विचार किया गया, जिसके तहत राज्य में साहसिक पर्यटन, जल पर्यटन, मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म, एग्रो टूरिज्म जैसी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन को उद्योग का...
छत्तीसगढ़ में बनेगी चित्रोत्पला फिल्म सिटी और सांस्कृतिक केंद्र
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को केंद्र सरकार से एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है। केंद्र सरकार ने स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2024-25 के तहत राज्य की दो महत्वपूर्ण पर्यटन परियोजनाओं के लिए 147.66 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी चित्रोत्पला फिल्म सिटी - पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा इसके अंतर्गत 95.79 करोड़ रूपए की लागत से माना तूता रायपुर में चित्रोत्पला फिल्म सिटी का निर्माण तथा 51.87 करोड़ रूपए की लागत से जनजातीय और सांस्कृतिक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण शामिल है।...
छत्तीसगढ़ में अब मत्स्य पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
धमतरी, दुर्ग और रायपुर पर है फोकस कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में पानी वाले इलाकों, जैसे धमतरी, दुर्ग और रायपुर में, मछली पालन और मत्स्य पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे मछली पालने वाले किसानों की आय बढ़ेगी और रोजगार के नए मौके भी मिलेंगे। मछली पालन से बढ़ेगी आमदनी मंत्री ने बताया कि पानी से भरपूर इलाकों में मछली पालन के जरिए गांवों की आर्थिक स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। इसके लिए किसानों को समूह और समितियों से जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें नई तकनीक, ट्रेनिंग...