छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के 22 मोटल व रिसॉर्ट को लीज पर देने की कार्यवाही शुरू
तीस-तीस वर्षों के लिए दी जाएगी लीज परनिजी निवेशक 21 अक्टूबर तक कर सकते है आवेदन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा अपने 22 मोटल एवं रिसॉर्ट के संचालन के लिए लीज पर दिए जाने की कार्यवाही की जा रही है। इन मोटल व रिसॉर्ट को तीस-तीस वर्षो के लिए लीज पर दिए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके लिए छत्तीसगढ़ एवं अन्य राज्यों के निजी निवेशक 21 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि पर्यटकों को व्यवसायिक दृष्टिकोण से अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से निजी...
घटारानी – जतमई मंदिर से 25 किलोमीटर दूर
जतमई मंदिर से 25 किलोमीटर दूर स्थित एक बड़ा झरना हैं। जतमई मंदिर में ज्यादा उत्साह और भक्ति के साथ नवरात्रि पर्व मनाया जाता है, यहाँ नवरात्रि की तरह विशेष उत्सव के मौकों पर एक सजावट देखतें बनता है। मानसून के बाद यह यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय है। मंदिर के निकट सुंदर झरना बहती है, जो इस जगह को और अधिक आकर्षक बना देता है झरना इस गंतव्य को पूरे परिवार के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बनाने पूर्ण प्रवाह में है। झरना मंदिर में प्रवेश करने से...
जतमई –
गरियाबंद में रायपुर से 85 किमी की दूरी पर स्थित है। एक छोटा सा जंगल के खूबसूरत स्थलों के बीच सेट, जतमई मंदिर माता जतमई के लिए समर्पित है। मंदिर खूबसूरती से कई छोटे शिखर या टावरों और एक एकल विशाल टॉवर के साथ ग्रेनाइट के बाहर खुदी हुई है। मुख्य प्रवेश द्वार के शीर्ष पर, एक पौराणिक पात्रों का चित्रण भित्ति चित्र देख सकते हैं। जतमई की पत्थर की मूर्ति गर्भगृह के अंदर रखा गया है। जतमाई पर्यटन छत्तीसगढ़ में एक खूबसूरत एवं आकर्षक स्थान है। यह छत्तीसगढ़ के महासमुंद...
लंकापल्ली जलप्रपात – शांत, निश्च्छल जलप्रपात
बीजापुर जिला मुख्यालय से 33 किमी दक्षिण दिशा की ओर आवापल्ली ग्राम है जो उसूर ब्लॉक का मुख्यालय है। यहां से पश्चिम दिशा में लगभग 15 किमी पर लंकापल्ली नामक ग्राम बसा हुआ है, जो यहां वर्ष के 12 माह निरंतर बहने वाले जलप्रपात के लिए प्रसिद्ध है। प्रकृति की गोद में शांत, निश्च्छल एवं स्वच्छंद रूप से अविरल बहती इस जलप्रपात को स्थानीय लोग गोंडी बोली में बोक्ता कहते हैं, चूंकि लंकापल्ली ग्राम के पास यह जलप्रपात स्थित है, इसलिए इसे लंकापल्ली झरने के नाम से जाना जाता है। लंकापल्ली...
‘घाटी की धुंध’ : बस्तर का मेन्द्री घुमर जलप्रपात
मेन्द्री घुमर जलप्रपात विशाल चित्रकोट झरने के रास्ते पर एक सुंदर मौसमी झरना है। प्रसिद्ध रूप से ‘घाटी की धुंध’ के रूप में जाना जाता है, मेहेंदरी घुमर के पास एक सुंदर घाटी है। यह 125-150 फीट ऊंचाई से गिरने वाली हरी घाटी के बीच चुपचाप अपनी उपस्थिति को चिह्नित करता है। शीर्ष से घने वन क्षेत्र को देखते हुए शांति महसूस कर सकती है।मेन्द्री घुमर जलप्रपात में सुंदर सुंदरता और बूंदा -बांदी इसे देखने के लिए एक आकर्षक अनुभव बनाती है। चित्रधारा, तामड़ा घूमर और मेन्द्री घुमर जलप्रपात चित्राकोट...
दो दिवसीय आर्ट, लिट्रेरेचर एंड फिल्म फेस्टिवल
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आर्ट, लिट्रेरेचर एंड फिल्म फेस्टिवल आज से यानी 14 अक्टूबर से दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि कला, साहित्य एवं फिल्म को लेकर एक ही मंच पर आयोजित किए जाने वाला यह देश एवं छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर पहली बार हो रहा है जिसमें कला, साहित्य, फिल्म, चित्रकारी, हस्तशिल्प से जुड़े कलाकार अपने-अपने अनुभव साझा करेंगे। छत्तीसगढ़ी थीम पर आयोजित होने वाले इस कार्यकम में 5 भाषा के लगभग 100 वक्त 14 व 15 अक्टूबर 2022 को...
चित्रधारा जलप्रपात : बस्तर की सुंदरता अद्भुत नमूना
बस्तर में झरनों की एक श्रृंखला है, उनमें से कई बारहमासी हैं, जबकि कुछ गर्मियों के दौरान पानी से वंचित हैं, लेकिन बारिश और सर्दियों के दौरान उनकी सुंदरता अद्वितीय है। चित्रधारा बाद की श्रेणी में आता है।चित्रधर झरना बस्तर की सुंदरता का एक अद्भुत नमूना है। चित्रकोट झरने के रास्ते पर, एक छोटी सी पहाड़ी के घाटी के माध्यम से एक छोटी नदी बहती है और यह किसानों की सोपानी पात की शुरुआत है। इस कारण से, बारिश के दौरान पानी होता है लेकिन गर्मियों में, इसकी उत्कृष्टता फीकी...
सिरपुर – ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता
अंतराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर अपनी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता के कारण आकर्षण का केंद्र हैं। यह पांचवी से आठवीं शताब्दी के मध्य दक्षिण कोसल की राजधानी थी। यह स्थल पवित्र महानदी के किनारे पर बसा हुआ हैं। सिरपुर में सांस्कृतिक एंव वास्तुकौशल की कला का अनुपम संग्रह हैं। पुरातन काल (सोमवंशी राजाओ का काल) में सिरपुर को `श्रीपुर` के नाम से जाना जाता था तथा यह दक्षिण कोसल की राजधानी थी भारतीय इतिहास में अपने धार्मिक मान्यताओ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण आकर्षण का केन्द्र था। इस स्थान पर...
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में जुड़ेगा नया रस्म
बस्तर दशहरा में अब आगामी वर्ष से एक नया रस्म जुड़ेगा। बस्तर दशहरा में चलने वाले रथ के निर्माण के लिए लगने वाली लकडिय़ों की क्षतिपूर्ति के लिए अब हर वर्ष साल और बीजा के पौधे लगाने का कार्य करने के साथ ही इसे बस्तर दशहरा के अनिवार्य रस्म में जोड़ा जाएगा। यह घोषणा सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष दीपक बैज ने मारकेल में बस्तर दशहरा रथ निर्माण क्षतिपूर्ति पौधरोपण कार्यक्रम की। इस अवसर पर सांसद श्री दीपक बैज ने कहा कि बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता के साथ...
सीढ़ीनुमा प्राकृतिक संरचनाओं से निर्मित – तीरथगढ जलप्रपात
जगदलपुर से 35 किलामीटर की दूरी पर स्थित यह मनमोहक जलप्रपात पर्यटकों का मन मोह लेता है। पर्यटक इसकी मोहक छटा में इतने खो जाते हैं कि यहाँ से वापिस जाने का मन ही नहीं करता। मुनगाबहार नदी पर स्थित यह जलप्रपात चन्द्राकार रूप से बनी पहाड़ी से 300 फिट नीचे सीढ़ी नुमा प्राकृतिक संरचनाओं पर गिरता है, पानी के गिरने से बना दूधिया झाग एवं पानी की बूंदों का प्राकृतिक फव्वारा पर्यटकों को मन्द-मन्द भिगो देता है। करोड़ो वर्ष पहले किसी भूकंप से बने चन्द्र-भ्रंस से नदी के डाउन...